29 अक्टूबर का मौसम: दिल्ली में बादल और बिजली, पूर्वी यूपी-बिहार में झमाझम की तैयारी
अक्टूबर का आख़िरी हफ़्ता आमतौर पर उत्तर भारत में सुबह की हल्की ठंडक और दोपहर की गुनगुनी धूप का होता है। इस बार कहानी थोड़ी अलग है। गुरुवार, 29 अक्टूबर को आसमान का मिज़ाज बदला हुआ दिखेगा। दिल्ली से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार तक मौसम विभाग ने अलग-अलग तरह की चेतावनियां दी हैं। कहीं गरज-चमक है, कहीं ओले का अंदेशा, और कहीं भारी बारिश।
सबसे पहले दिल्ली की बात, क्योंकि राजधानी में सबसे ज़्यादा लोग मौसम की ख़बर पर नज़र रखते हैं।
दिल्ली-NCR: बादल छाएंगे, तापमान नीचे आएगा
IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक दिल्ली में 29 अक्टूबर को आसमान आमतौर पर बादलों से घिरा रहेगा और कई जगहों पर बहुत हल्की से हल्की बारिश हो सकती है। साथ में गरज-चमक और तेज़ सतही हवाओं की भी संभावना है, जिनकी रफ़्तार कई जगह 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। imd
तापमान की बात करें तो IMD दिल्ली के बुलेटिन में उस दिन का अधिकतम तापमान 25 से 27 डिग्री और न्यूनतम 16 से 18 डिग्री के बीच बताया गया है। कुछ निजी वेबसाइटों पर आंकड़े थोड़े अलग दिख सकते हैं। मसलन एक पोर्टल ने अधिकतम तापमान 30 डिग्री के आसपास दिखाया है। इसलिए बेहतर है कि आप सुबह निकलने से पहले IMD का ताज़ा अपडेट एक बार देख लें। मौसम का अनुमान जैसे-जैसे वक़्त पास आता है, वैसे-वैसे सुधरता जाता है। imd
एक और बात गौर करने लायक है। मौसम विभाग के हवाले से बताया गया है कि 29 और 30 अक्टूबर को दिल्ली में अधिकतम तापमान 2 से 4 डिग्री तक गिर सकता है। यानी जिन लोगों ने अभी रजाई-कंबल निकालने की सोची भी नहीं थी, उन्हें शाम को हल्की ठंड महसूस हो सकती है।
ओलावृष्टि का अलर्ट: ये हिस्सा हल्के में न लें
दिल्ली के लिए सबसे ज़्यादा ध्यान खींचने वाली चेतावनी बारिश की नहीं, ओलों की है। IMD ने 29 और 30 अक्टूबर के दौरान हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब के अलग-अलग इलाकों में ओलावृष्टि की संभावना जताई है। इसके अलावा दिल्ली में 28 से 31 अक्टूबर के बीच बिजली कड़कने और तेज़ हवाओं की संभावना है, जिनकी रफ़्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंकों में 60 तक जा सकती है।
इसका मतलब आम दिनचर्या के लिए क्या है? कुछ सीधी बातें:
पहली बात, अगर आप दोपहिया वाहन से दफ़्तर जाते हैं तो तेज़ हवा के झोंके और अचानक आई बौछार सबसे ज़्यादा परेशान करेंगे। ऐसे में रेनकोट साथ रखिए और बड़े होर्डिंग या कमज़ोर पेड़ों के नीचे रुकने से बचिए।
दूसरी बात, खुले में खड़ी गाड़ियों को ओलों से नुकसान हो सकता है। जिनके पास पार्किंग की सुविधा है, वे कार को ढकी जगह में रख दें।
तीसरी बात, बिजली गिरने के समय खुले मैदान, ऊंचे पेड़ और बिजली के खंभों से दूर रहना ही समझदारी है। यह बात हर साल दोहराई जाती है, फिर भी हादसे होते हैं।
पूर्वी उत्तर प्रदेश: असली मार यहां पड़ सकती है
अगर दिल्ली में मौसम बस थोड़ा बिगड़ने वाला है, तो पूर्वी यूपी के लिए तस्वीर ज़्यादा गंभीर है। IMD ने 29 अक्टूबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। इसी बुलेटिन में पूर्वी यूपी में 29 और 30 अक्टूबर को अलग-अलग जगहों पर बहुत भारी बारिश का भी ज़िक्र है।
यहां “अलग-अलग जगहों” वाली बात समझना ज़रूरी है। मौसम विभाग जब किसी इलाके के लिए “isolated” यानी बिखरी हुई बारिश कहता है, तो मतलब यह नहीं कि पूरे प्रदेश में एक जैसा पानी बरसेगा। कहीं एक ज़िले में सड़कें डूब सकती हैं और बगल के ज़िले में बस बूंदाबांदी हो सकती है। इसलिए अपने शहर के लिए स्थानीय अलर्ट देखना ज़्यादा काम का है।
इस मौसम में बारिश का एक और पहलू है, जिसे किसान सबसे पहले महसूस करते हैं। अक्टूबर के आख़िर में धान की कटाई और खेतों में पड़ी फ़सल का वक़्त होता है। कटी हुई फ़सल खेत या खलिहान में पड़ी हो और बहुत भारी बारिश आ जाए, तो नुकसान तय है। जिन किसानों ने फ़सल काटकर खुले में रखी है, उनके लिए अगले दो दिन उसे ढकने या सुरक्षित जगह पहुंचाने के हैं।
शहरों में दिक्कत दूसरी होगी। जलभराव, ट्रैफ़िक जाम और बिजली की आंख-मिचौली। नालियों की सफ़ाई का हाल हर शहर जानता है। थोड़ी तेज़ बारिश में ही निचले इलाकों में पानी भर जाता है।
बिहार: बारिश के साथ बिजली का ख़तरा भी
बिहार भी इस सिस्टम की ज़द में है। ऊपर बताए गए बुलेटिन के हिसाब से 29 अक्टूबर को बिहार में कई जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। बिहार के लिए एक अतिरिक्त चिंता वज्रपात की रहती है। ग्रामीण इलाकों में खेतों में काम करने वाले लोग बिजली गिरने का शिकार सबसे ज़्यादा बनते हैं। बादल गरजने लगें तो खेत या खुले में काम छोड़कर पक्के मकान में चले जाना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।
यह छठ के बाद का समय है और बहुत से लोग त्योहार के लिए घर आए हुए हों या लौटने की तैयारी में हों, तो यात्रा की योजना बनाते वक़्त भी मौसम का ध्यान रखना चाहिए। ट्रेन और सड़क, दोनों रास्तों पर देरी की गुंजाइश रखिए।
इतनी बारिश आ कहां से रही है?
आम पाठक के मन में सवाल उठता है कि मानसून तो जा चुका है, फिर ये बारिश कैसी? दरअसल अक्टूबर के आख़िर और नवंबर की शुरुआत में बारिश का मतलब हमेशा मानसून नहीं होता। इस मौसम में पश्चिम से आने वाली हवाओं की गड़बड़ी (जिसे पश्चिमी विक्षोभ कहते हैं) और समुद्र की तरफ़ से आने वाली नमी मिलकर बादल बना देती हैं। जब ये दोनों उत्तर और पूर्वी भारत के ऊपर एक साथ आ जाएं, तो गरज-चमक, तेज़ हवा और कभी-कभी ओले भी पड़ जाते हैं। यही वजह है कि एक ही दिन दिल्ली में ओले का अलर्ट है और पूर्वी यूपी-बिहार में भारी बारिश का। (यह सामान्य मौसम-विज्ञान की व्याख्या है, IMD के बुलेटिन में इसका सीधा ज़िक्र नहीं है।)
अगले कुछ दिन कैसे रहेंगे
एक दिन का मौसम अकेले नहीं देखा जाना चाहिए। दिल्ली के लिए IMD का पांच दिन का अनुमान बताता है कि 30 अक्टूबर को भी आसमान आंशिक से आमतौर पर बादलों से घिरा रहेगा, सुबह से दोपहर के बीच कई जगह गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है और 30-40 किलोमीटर प्रति घंटा की तेज़ हवाएं चल सकती हैं। यानी 29 के बाद भी राहत तुरंत नहीं मिलेगी। हां, बाद के दिनों में आसमान धीरे-धीरे साफ़ होने के संकेत हैं, और जैसे ही बादल हटेंगे, सुबह-शाम की ठंड बढ़ती दिखेगी।
आम आदमी के लिए छोटी-छोटी सलाहें
मौसम की ख़बर तभी काम की है जब उससे कुछ करने को मिले। इसलिए ये बातें याद रखिए:
घर से निकलने से पहले छाता या रेनकोट रख लें, भले ही सुबह धूप दिखे। गरज वाले बादल अक्सर दोपहर या शाम में अचानक बनते हैं।
मोबाइल और पावर बैंक चार्ज रखिए। तेज़ हवा और बारिश में बिजली गुल होना आम बात है।
जिन इलाकों में जलभराव होता है, वहां शाम को लौटने का रास्ता पहले से सोच लें। गूगल मैप पर ट्रैफ़िक देखना काम आएगा।
बच्चों और बुज़ुर्गों का ख़याल रखिए। तापमान के अचानक गिरने से सर्दी-ज़ुकाम और वायरल बुखार के मामले इन्हीं मौसम-बदलाव के दिनों में सबसे ज़्यादा बढ़ते हैं।
छत पर रखा सामान, गमले और सुखाए हुए कपड़े समेट लें। 50-60 की रफ़्तार वाली हवा हल्की चीज़ों को उड़ा ले जाती है।
एक बात और: अनुमान, अनुमान ही होता है
मौसम विभाग का पूर्वानुमान बहुत भरोसेमंद हुआ है, पर यह फिर भी संभावना की भाषा में बात करता है। “संभावना” का मतलब गारंटी नहीं। कभी अनुमान से कम बारिश होती है, कभी ज़्यादा। इसलिए अलर्ट को डर की तरह नहीं, तैयारी के संकेत की तरह लीजिए। रेड, ऑरेंज या येलो अलर्ट अपने इलाके के लिए अलग-अलग देखिए, क्योंकि एक राज्य के भीतर भी हर ज़िले की स्थिति अलग होती है।
फिलहाल इतना तय है कि गुरुवार को उत्तर और पूर्वी भारत में आसमान शांत नहीं रहने वाला। दिल्ली-NCR वाले बादल, हवा और ओलों के लिए तैयार रहें, और पूर्वी यूपी-बिहार वाले भारी बारिश और बिजली के लिए। थोड़ी सावधानी और थोड़ी पहले से की गई तैयारी में आप बहुत-सी परेशानी से बच सकते हैं।
(जानकारी 27-28 अक्टूबर 2026 तक के IMD बुलेटिन और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित। ताज़ा स्थिति के लिए IMD की वेबसाइट देखें।)