
करवा चौथ का व्रत सुबह की सरगी से शुरू होता है, पर असली इंतज़ार शाम को छत पर होता है, जब सबकी नज़र आसमान पर टिकी रहती है। इस साल यह व्रत गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को पड़ा। इस लेख में हम शहर-दर-शहर चाँद निकलने का समय, पूजा का मुहूर्त और मौसम से जुड़ी वह बात देखेंगे जिसने इस बार कई घरों की चिंता बढ़ाई।
एक बात पहले साफ़ कर दूँ। यह लेख 30 अक्टूबर को लिखा गया है, यानी व्रत बीत चुका है। इसलिए यह एक रिपोर्ट भी है और आने वाले सालों के लिए काम की जानकारी भी।
तारीख़ को लेकर उलझन क्यों रही?
इस साल कई लोग 28 और 29 अक्टूबर के बीच उलझे हुए थे। नवभारत लाइव ने तो अपनी रिपोर्ट में सवाल ही यही रखा कि करवा चौथ 28 को है या 29 को। ज़्यादातर पंचांग-आधारित रिपोर्टों में तारीख़ 29 अक्टूबर ही मिली। संडे गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को रात 1:06 बजे शुरू हुई और उसी दिन रात 10:09 बजे ख़त्म हुई। इसका मतलब चतुर्थी का पूरा शाम का समय 29 तारीख़ को ही पड़ा, और करवा चौथ में यही सबसे अहम शर्त है।
कुछ वेबसाइटों पर 28 अक्टूबर और दिल्ली में रात 8:41 बजे का समय भी दिख जाता है। यह जानकारी दूसरे स्रोतों से मेल नहीं खाती, इसलिए ऐसी साइटों पर भरोसा करने से पहले पंचांग से मिलान कर लेना चाहिए।
सरगी से पारण तक: व्रत का समय
टाइम्सबुल की रिपोर्ट के अनुसार पूजा का समय गुरुवार 29 अक्टूबर को शाम 5:38 से 6:56 बजे तक रहा, जबकि व्रत सुबह 6:31 से रात 8:17 तक रखा जाना था। यह समय दिल्ली के लिए है। जिस शहर में चाँद पहले निकलता है, वहाँ व्रत भी थोड़ा पहले खुल सकता है।
परंपरा के बारे में न्यूज़24 की रिपोर्ट बताती है कि महिलाएँ पूजा करती हैं, चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं और उसके बाद व्रत पूरा करती हैं। टाइम्सबुल के अनुसार इस दिन विवाहित महिलाएँ पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं और करवा माता के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं।
उत्तर भारत के शहरों में चाँद का समय
अब वह जानकारी जिसके लिए सबसे ज़्यादा लोग खोजते हैं। नीचे के समय पंचांग पर आधारित अनुमान हैं और अलग-अलग रिपोर्टों से लिए गए हैं।
दिल्ली-एनसीआर: संडे गार्डियन के मुताबिक नई दिल्ली में चाँद करीब 8:17 बजे निकलने का अनुमान था और नोएडा में 8:16 बजे। टाइम्सबुल ने गुरुग्राम के लिए 8:18 बजे और ग़ाज़ियाबाद के लिए करीब 8:16 बजे का समय दिया। उसी रिपोर्ट के अनुसार दृक पंचांग का हवाला देते हुए कहा गया कि दिल्ली-एनसीआर के अलग-अलग इलाक़ों में समय में एक से दो मिनट का फ़र्क़ हो सकता है।
उत्तर प्रदेश: न्यूज़24 की रिपोर्ट में लखनऊ का समय रात 8:06 बजे बताया गया। टाइम्सबुल में आसपास के शहरों के आँकड़े भी हैं: कानपुर में करीब 8:05 बजे, प्रयागराज में करीब 8:00 बजे और आगरा में करीब 8:15 बजे। नवभारत लाइव के अनुसार वाराणसी में चाँद रात 8:02 बजे निकलना था।
पूर्वी भारत: संडे गार्डियन की रिपोर्ट में कोलकाता में करीब 7:47 बजे चाँद निकलने का अनुमान था। पटना के लिए नवभारत लाइव ने रात 7:52 बजे का समय दिया। यानी पूर्व में चाँद पहले उगता है।
पश्चिम और दक्षिण भारत में चाँद देर से क्यों?
संडे गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार मुंबई के लोगों को करीब 9 बजे तक इंतज़ार करना पड़ सकता था। नवभारत लाइव के आँकड़े बताते हैं कि दक्षिण में प्रतीक्षा और लंबी रही: हैदराबाद में रात 8:41 बजे, चेन्नई में 8:44 बजे और बेंगलुरु में 8:55 बजे।
इसकी वजह भूगोल है। भारत पूरब से पश्चिम तक बहुत फैला है, इसलिए पूरब में सूर्य और चाँद पहले उगते-डूबते हैं और पश्चिम में बाद में। अक्षांश भी असर डालता है, यानी चाँद के उगने का कोण और समय उत्तर और दक्षिण में अलग होता है। इसी कारण एक ही दिन अलग शहरों में चाँद निकलने के समय में आधे घंटे या उससे ज़्यादा का फ़र्क़ आ जाता है।
एक ही शहर के दो अलग समय क्यों दिखते हैं?
अगर आपने दो वेबसाइटें देखी हों तो एक ही शहर के समय में कुछ मिनट का अंतर मिला होगा। ऑक्साम की टूल रिपोर्ट में दिल्ली का समय 8:12 बजे और लखनऊ का 8:01 बजे दिया गया था, जबकि पंचांग-आधारित ख़बरों में 8:17 और 8:06 बजे थे। यह पाँच मिनट का अंतर मुख्यतः गणना की पद्धति से आता है। कुछ वेबसाइटें खगोलीय चंद्रोदय (क्षितिज पर चाँद का ऊपरी किनारा) गिनती हैं और कुछ पंचांग की परंपरागत गणना।
व्यावहारिक सलाह यह है कि जिस पंचांग को आपका परिवार मानता है, उसी का समय देखें। ज़्यादातर घरों में दृक पंचांग का समय इस्तेमाल होता है, जो ऊपर की रिपोर्टों में भी मिलता है।
इस बार मौसम ने क्या खेल किया?
इस साल मौसम की ख़बर भी करवा चौथ से जुड़ी रही। न्यूज़24 की रिपोर्ट के अनुसार 29 अक्टूबर को मौसम बदलने की संभावना थी, जिसमें दिल्ली-एनसीआर में दोपहर और शाम को बादल और हल्की बौछारें आ सकती थीं। इसका संबंध बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती तूफ़ान से जोड़ा गया, जो अर्णब था और उसी दिन आंध्र प्रदेश के तट से टकराया। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ महिलाएँ बादल छाने पर चाँद देखने के लिए ज़्यादा देर इंतज़ार करने की सोच रही थीं, और कुछ दूसरे शहरों में रहने वाले रिश्तेदारों की मदद से ऑनलाइन चाँद देखने के विकल्प पर विचार कर रही थीं।
यह चिंता नई नहीं है। हर साल कहीं न कहीं बादल या कोहरा चाँद को छिपा देता है। मौसम के कारण उस रात दिल्ली-एनसीआर के हर घर में चाँद साफ़ दिखा या नहीं, इसकी कोई एक पुष्ट रिपोर्ट मुझे नहीं मिली, इसलिए मैं इस पर कुछ नहीं कहूँगा।
अगर चाँद बादलों के पीछे छिप जाए तो?
इस सवाल का कोई एक “सही” जवाब नहीं है, क्योंकि अलग परिवारों और पंडितों की परंपराएँ अलग हैं। पर व्यवहार में लोग इन तरीक़ों से काम चलाते हैं:
- थोड़ा इंतज़ार करें। ज़ेंडर यूनिवर्स की मार्गदर्शिका के अनुसार धुंध या बादल हों तो चाँद के क्षितिज की परत के ऊपर उठने के लिए करीब 15 मिनट और रुका जा सकता है। अक्सर चाँद थोड़ी देर में बादलों के बीच से झाँक जाता है।
- पंचांग का समय देख लें। जब चंद्रोदय का तय समय निकल जाए और आसमान ढका हो, तब बहुत-से परिवार मान लेते हैं कि चाँद उग चुका है।
- वीडियो कॉल पर देखें। अगर कहीं और चाँद साफ़ दिख रहा है तो रिश्तेदार से लाइव दर्शन करना आजकल आम चलन है, जैसा ऊपर की रिपोर्ट में भी लिखा है।
- अपने पंडित या घर के बड़ों से पूछें। क्षेत्र और परंपरा के हिसाब से नियम बदल सकते हैं, और यह धार्मिक आस्था का मामला है।
मैं यहाँ किसी धार्मिक मान्यता को सही या ग़लत ठहराने की कोशिश नहीं कर रहा। यह सिर्फ़ उन व्यावहारिक तरीक़ों की जानकारी है जो लोग अपनाते हैं।
चाँद देखने के लिए कुछ आसान सुझाव
- पहले से छत या खुली जगह तय करें। शहरों में ऊँची इमारतें पूर्वी क्षितिज को ढक देती हैं।
- पूर्व दिशा पर ध्यान दें। चाँद पूर्व-दक्षिण-पूर्व की ओर से निकलता है।
- आसमान साफ़ न हो तो ऐप का सहारा लें। चाँद की सटीक स्थिति दिखाने वाले मुफ़्त ऐप मददगार हैं।
- सुरक्षा का ध्यान रखें। पूरे दिन के उपवास के बाद ज़्यादा देर खड़े न रहें, छत के किनारे से दूर रहें और बच्चों का ध्यान रखें।
- जिन्हें डायबिटीज़ या कोई बीमारी है, वे अपने डॉक्टर की सलाह लें।
अगले साल के लिए क्या करें?
करवा चौथ की तारीख़ हर साल बदलती है क्योंकि यह कार्तिक कृष्ण चतुर्थी पर निर्भर करती है, जो चंद्र कैलेंडर से तय होती है। अगले साल की तारीख़ और चंद्रोदय का समय मैंने अभी जाँचा नहीं है, इसलिए उसे यहाँ नहीं लिख रहा। तारीख़ तय होने पर पंचांग या किसी भरोसेमंद समाचार स्रोत से अपने शहर का समय देख लें।
एक सुझाव और: व्रत के दिन से तीन-चार दिन पहले शहर का समय देख लें, और व्रत के दिन भी शाम को एक बार फिर पुष्टि कर लें, क्योंकि बड़ी वेबसाइटें अक्सर समय सुधारती रहती हैं।
करवा चौथ की सांस्कृतिक झलक
करवा चौथ मुख्य रूप से उत्तर भारत का पर्व है। विकिपीडिया के अनुसार यह व्रत पारंपरिक रूप से नेपाल और दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, जम्मू, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में मनाया जाता है। उसी स्रोत में एक दिलचस्प बात यह भी है कि यह त्योहार गेहूँ की बुवाई के समय पड़ता है, यानी रबी की फ़सल चक्र की शुरुआत के आसपास।
टाइम एंड डेट डॉट कॉम की एक पुरानी रिपोर्ट के अनुसार यह पर्व पहले मुख्यतः उत्तर भारत तक सीमित था, पर टीवी धारावाहिकों और फ़िल्मों के चलते अब देश के दूसरे हिस्सों और विदेश में बसे भारतीयों में भी लोकप्रिय हो गया है। उसी रिपोर्ट के मुताबिक कई महिलाएँ दिन सहेलियों के साथ गाते-बजाते और मेहंदी लगाते बिताती हैं, फिर परिवार के साथ चाँद दिखने पर व्रत खोलती हैं।
निष्कर्ष
करवा चौथ का चाँद हर साल थोड़ी अलग घड़ी पर निकलता है और हर शहर के लिए अलग। इस साल दिल्ली में करीब 8:17 बजे, लखनऊ में 8:06 बजे, कोलकाता में 7:47 बजे और मुंबई में लगभग 9 बजे का अनुमान था। मौसम ने चिंता ज़रूर बढ़ाई, पर परंपरा में इंतज़ार की गुंजाइश हमेशा रही है।
असली बात समय नहीं, आस्था और साथ का भाव है, और सही जानकारी बस उस इंतज़ार को आसान बना देती है।
अस्वीकरण: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। चंद्रोदय के समय अनुमानित हैं और अलग पंचांगों में थोड़ा अंतर संभव है। धार्मिक नियमों के लिए अपने पारिवारिक पंडित या परंपरा का पालन करें। व्रत रखने से पहले स्वास्थ्य संबंधी सलाह ज़रूर लें।