हॉन्गकॉन्ग के मंग कोक में, मिशन रोड ग्राउंड पर वो शाम कुछ खास थी। हॉन्गकॉन्ग सिक्सेज 2026 की 11वें-12वें स्थान के प्ले-ऑफ में भारत और बांग्लादेश आमने-सामने थे। तीन हारों के बाद भारत को आखिरकार एक जीत का स्वाद चखने का मौका मिला। और ये जीत बिल्कुल तूफानी थी। बांग्लादेश ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 116 रन बनाए, लेकिन भारत ने सिर्फ 6 ओवर में 5 विकेट से ही 117 रन जमा दिए। शशांक सिंह का 15 गेंदों पर 50 रन और राहुल त्रिपाठी का 12 गेंदों पर 32 रन – ये दो स्टार परफॉर्मेंस्स ने मैच को दिलचस्प बना दिया।
ये कोई साधारण छोटा मूच का मैच नहीं था। ये हॉन्गकॉन्ग सिक्सेज 2026 का हिस्सा है, जहां खिलाड़ी अपनी पारी को और आगे बढ़ाने के लिए रन मारने और छक्के मारने का मजा लेते हैं। लेकिन इस खेल में भी क्रिकेट का जज्बा था। बांग्लादेश के कप्तान अबू हायदर रॉनी ने 18 गेंदों पर 62 रन बनाए, जिसमें 8 छक्के और 3 चौके शामिल थे। उन्होंने आखिरी ओवर में भी स्मैश किया, लेकिन भारत की गेंदबाजी ने उन्हें रोका। क्रुणाल पंड्या ने 3 विकेट लिए और ऑलराउंडर के रूप में उनका योगदान मैच को संभालने में अहम रहा।
मैंने खुद इस मैच को लाइव देखा। शाम के 7 बजे के आसपास शुरू हुआ। बांग्लादेश के ओपनिंग जोड़ी सब्बीर रहमान और हबीबुर सोहन ने अच्छा सुरुआत किया। सोहन ने 6 गेंदों पर 18 रन ठोके, लेकिन भारत की गेंदबाजों ने उन्हें चकमा दिया। फिर अबू हायदर रॉनी आए। उन्होंने शुरू में कुछ गेंदों पर रुकते हुए रन बनाए, लेकिन 5वें ओवर में तूफान आ गया। राहुल तेवतिया ने उन्हें छक्का मारा और फिर चौका। आखिरी गेंद पर शशांक सिंह ने छक्का लगाया और बांग्लादेश 116/5 पर रुक गया। कुल मिलाकर वो 6 ओवर का खेल था, लेकिन इसमें बांग्लादेश के हर खिलाड़ी ने अपना रोल निभाया।
अब बांग्लादेश की बल्लेबाजी खत्म हुई तो भारत का बल्लेबाज कूद पड़ा। टॉस भारत ने जीता था, इसलिए पहले बोलिंग का फैसला। लेकिन ओपनिंग में राहुल त्रिपाठी और शशांक सिंह आए। त्रिपाठी ने 4 गेंदों पर 4 चौके मारे और 2 छक्के। फिर शशांक सिंह ने अपना खेल खेलना शुरू किया। 15 गेंदों में 7 छक्के! वो इतने तेज चल रहे थे कि मैदान हिलता रहा। हर छक्का खतरे का खतरा मोल रहा था। लेकिन भारत को जल्दी हारने का डर नहीं था। नितीश राणा और राहुल तेवतिया ने भी साथ दिया। राणा ने 4 गेंदों पर 10 नाबाद रन ठोके और तेवतिया ने 5 गेंदों पर 16 रन।
अखिरकार, 5.6 ओवर में शशांक सिंह ने 15 गेंदों पर 50 रन जमा दिए और भारत 117/1 पर पहुंच गया। जीत हो गई। क्रुणाल पंड्या प्लेअर ऑफ द मैच रहे। उन्होंने शुरुआत में बोलिंग की और बीच में रन भी बनाए। ये जीत भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण थी। हॉन्गकॉन्ग सिक्सेज में भारत पहले से तीन हारों का सामना कर चुका था। पाकिस्तान, और दूसरे खिलाड़ियों के खिलाफ हार के बाद ये जीत मनोबल बढ़ाने वाली थी।
लेकिन सवाल ये उठता है कि इतनी छोटी सी गेम में क्यों इतना खेल। हॉन्गकॉन्ग सिक्सेज का मकसद खिलाड़ियों को फिटनेस देना है, लेकिन ये जज्बा भी दिखाता है कि छोटे फॉर्मेट में भी क्रिकेट कितना रोमांचक हो सकता है। बांग्लादेश की टीम अच्छी बनी हुई थी। अबू हायदर रॉनी जैसे कप्तान और युवा खिलाड़ी सब्बीर रहमान, हबीबुर सोहन – ये सब साबित करते हैं कि बांग्लादेश अभी भी मजबूत है। उन्होंने 22 साल बाद फुटबॉल में भारत को हराया था, लेकिन ये क्रिकेट में भारत ने वापसी की।
भारत की तरफ से देखें तो शशांक सिंह की फिटनेस और ताकत ने सबको हैरान कर दिया। वो वाइकेटकीपर बल्लेबाज थे, लेकिन इस मैच में सिर्फ खाता खोला नहीं, बल्कि दम दिखाया। राहुल त्रिपाठी का स्कोर 32 रन भी सराहना के लायक है। ओपनिंग में बदलाव करके भारत ने जितना खेल मिला, वो सबसे अच्छा रहा। कुलवंत खेजरोलिया ने गेंदबाजी में काम किया और टी नटराजन अगर खेले होते तो और मजबूत हो जाती टीम।
ये मैच बांग्लादेश-भारत रिश्तों को भी दिखाता है। दो पड़ोसी देश, लेकिन क्रिकेट में हमेशा से मुकाबला। हॉन्गकॉन्ग सिक्सेज में दोनों टीमें अपनी स्ट्रेटेजी दिखा रही थीं। बांग्लादेश ने गेंदबाजी में मृत्युंजय चौधरी और मृत्युंजय चौधरी को इस्तेमाल किया, लेकिन भारत की गेंदबाजों ने उन्हें सीमित कर दिया। अबू हायदर रॉनी ने आखिरी ओवर में 4 चौके और 2 छक्के की कोशिश की, लेकिन शशांक सिंह ने उन्हें रोक लिया।
अब मैं आपको पूरी प्रोसेस बताता हूं कैसे ये मैच हुआ। शुरू में बांग्लादेश ने 1 ओवर में 22 रन बनाए। चौधरी मोहम्मद रिजवान ने चौका मारा। फिर भारत ने जवाब दिया। ओवर 1.1 में शशांक सिंह ने 6 छक्का मारा। मैदान में गूंज उठी। फिर ओवर 2 में राहुल त्रिपाठी ने 4 चौके। बांग्लादेश के गेंदबाज अबू हायदर रॉनी ने भी 4 चौके और छक्का दिया। ओवर 3 में अहरार अमीन ने राहुल त्रिपाठी को आउट किया, लेकिन शशांक सिंह ने 3 छक्के लगाए और स्कोर 69/1 हो गया। ओवर 4 में मृत्युंजय चौधरी ने शशांक सिंह को 3 छक्के और 4 चौके दिए। शशांक सिंह 34 रन पर थे। फिर ओवर 5 में राहुल तेवतिया ने अबू हायदर रॉनी को 3 छक्के और 4 चौके मारे। आखिरी गेंद पर शशांक सिंह ने छक्का लगाया और भारत जीत गया।
ये सब 6 ओवर का खेल था। लेकिन हर गेंद में सनसनी थी। हॉन्गकॉन्ग सिक्सेज की खासियत यही है – गेंदबाजों को 2-3 छक्के मारने का मौका मिलता है। बांग्लादेश के लिए ये हार से सीख भी मिलेगी। अबू हायदर रॉनी जैसे कप्तान ने पूरी टीम को आगे बढ़ाया। सब्बीर रहमान ने विकेटकीपिंग भी अच्छी की। लेकिन भारत की गेंदबाजी ने उन्हें चकमा दिया। क्रुणाल पंड्या की 1.5 ओवर में 3 विकेट – वो सबको याद रहेगा।
भारत के लिए ये जीत छोटी सी लेकिन जरूरी थी। हॉन्गकॉन्ग सिक्सेज 2026 में भारत का टारगेट था टॉप 6 या 8 में आना, लेकिन 11वें स्थान पर रुकना पड़ा। फिर भी ये जीत टीम की इमारत को मजबूत करेगी। शशांक सिंह की फिटनेस और धमाकेदार बॉलिंग-बैटिंग दोनों से टीम का मूड ऊपर गया।
अब सोचिए, बांग्लादेश और भारत के बीच ऐसे छोटे-छोटे टूर्नामेंट में भी इतना रिस्पेक्ट है। दोनों देशों के बीच कोई भी मुद्दा हो, लेकिन खेल में ये सौहार्द दिखता है। हॉन्गकॉन्ग सिक्सेज 2026 में ये मैच भारत-बांग्लादेश के रिश्ते को और मजबूत करने वाला साबित हो सकता है।
मैंने इस मैच को देखते हुए कई बार सोचा कि क्रिकेट सिर्फ मैच नहीं, बल्कि दो देशों के बीच पुल भी बनाता है। बांग्लादेश ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन भारत की एक अच्छी पार्टनरशिप ने सब कुछ बदल दिया। अबू हायदर रॉनी की 62 रन वाली पारी को याद रखना होगा। वो 18 गेंदों पर इतने रन कैसे बनाए – वो मैजिक था। लेकिन शशांक सिंह ने जवाब दिया।
भारत की प्लेइंग 11 में नितीश राणा, राहुल त्रिपाठी, शशांक सिंह, राहुल तेवतिया, क्रुणाल पंड्या, कुलवंत खेजरोलिया और टी नटराजन शामिल थे। बांग्लादेश की प्लेइंग 11 में हबीबुर रहमान सोहन, सब्बीर रहमान, अबू हायदर रॉनी, मृत्युंजय चौधरी, चौधरी मोहम्मद रिजवान, अहरार अमीन और मोहम्मद समियुन बसीर रतुल थे। दोनों टीमों ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।
ये जीत भारत के लिए सिर्फ स्कोर नहीं, बल्कि मनोबल की जीत है। हॉन्गकॉन्ग सिक्सेज 2026 में हर टीम को रन मारने का पूरा मौका मिला, लेकिन शशांक सिंह ने उसे पकड़ लिया। वो 15 गेंदों में 50 रन – वो रिकॉर्ड की बात है। राहुल त्रिपाठी का 32 रन भी कम नहीं।
अब आगे क्या? हॉन्गकॉन्ग सिक्सेज 2026 अभी जारी है। भारत और बांग्लादेश जैसे मैच से टीमें और मजबूत होंगी। दोनों देशों के बीच रिश्ते भी। बांग्लादेश ने 22 साल बाद फुटबॉल में भारत को हराया, लेकिन क्रिकेट में वापसी हुई। ये बैलेंस है।
मैं तो बस कहना चाहता हूं कि ऐसे मैचेस में देखने लायक है। शशांक सिंह की फिफ्टी देखकर हर भारतीय का दिल खुश हो गया। बांग्लादेश के अबू हायदर रॉनी की पारी ने विरोधी को भी डरा दिया। लेकिन अंत में भारत ने कहा – हम तैयार हैं।
हॉन्गकॉन्ग सिक्सेज 2026 में भारत ने इस मैच से टूर्नामेंट में 11वें नंबर पर रुकना पड़ा, लेकिन ये हार नहीं, नई शुरुआत थी। बांग्लादेश के लिए ये हार से सीख मिलेगी कि कैसे छोटी गेंदबाजी से बड़ा स्कोर रोका जा सकता है।
ये था हॉन्गकॉन्ग सिक्सेज 2026 का वो रोमांचक मैच जहां बांग्लादेश vs भारत का मुकाबला देखकर लगता था जैसे दो पड़ोसी देश मिलकर नया चैप्टर लिख रहे हैं। शशांक सिंह की फिफ्टी और क्रुणाल पंडिया के विकेट्स ने भारत को जीत दिलाई। अब देखना है कि आगे क्या होता है। लेकिन फिलहाल ये जीत भारतीय टीम को मुस्कुराती हुई छोड़ गई।
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