
28 अक्टूबर 2026 को मुंबई में जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग का समारोह हुआ। मंच पर जो भाषण सबसे ज़्यादा चर्चा में रहा, वह अनंत अंबानी का था। रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के कार्यकारी निदेशक अनंत सालों तक कारोबारी सुर्ख़ियों से दूर रहे। बीते डेढ़ साल में वे बोर्डरूम, वन्यजीव संरक्षण और पारिवारिक आयोजनों, तीनों वजहों से बार-बार ख़बरों में आए।
यह लेख उनके हालिया घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा है। इसमें उनके पक्ष की बातें भी हैं और उठे सवाल भी।
लिस्टिंग समारोह में क्या बोले?
आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार अनंत ने अपनी बात की शुरुआत “आभार” शब्द से की और कहा कि यह मौक़ा उन करोड़ों भारतीयों का है जिन्होंने जियो के शुरुआती दिनों से उस पर भरोसा किया। उन्होंने यह भी कहा कि आज जियो देश के साथ साझा हो गया है।
भाषण का एक बड़ा हिस्सा प्रधानमंत्री के प्रति धन्यवाद पर रहा। उन्होंने डिजिटल इंडिया के विज़न का ज़िक्र किया और कहा कि इसी ने जियो को उसका उद्देश्य दिया। उन्होंने रिलायंस समूह की ओर से विकसित भारत के लक्ष्य में भूमिका निभाते रहने की बात भी दोहराई।
यहाँ एक बात ध्यान देने लायक है। जियो प्लेटफॉर्म्स की कमान औपचारिक रूप से उनके भाई आकाश अंबानी के पास है। बजाज ब्रोकिंग के अनुसार आकाश कंपनी के प्रबंध निदेशक हैं। फिर भी अनंत का मंच से बोलना इस बात का संकेत माना जा सकता है कि परिवार की तीनों संतानें समूह की बड़ी घटनाओं में बराबर दिखना चाहती हैं। यह मेरा अपना आकलन है, कोई घोषित तथ्य नहीं।
रिलायंस बोर्ड में अनंत की भूमिका
कारोबार में अनंत की स्थिति पिछले साल से काफ़ी बदली है। हेराल्ड गोवा की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने 1 मई 2025 से पाँच साल के कार्यकाल के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के पूर्णकालिक कार्यकारी निदेशक की ज़िम्मेदारी संभाली। इससे पहले वे गैर-कार्यकारी निदेशक थे।
इस नियुक्ति को शेयरधारकों का बड़ा समर्थन मिला। 94.4 प्रतिशत वोट उनके पक्ष में पड़े। फिर भी यह फ़ैसला बिना बहस के नहीं गुज़रा। उसी रिपोर्ट के अनुसार उनके सबसे युवा पूर्णकालिक निदेशक बनने पर पहले सवाल उठे थे, लेकिन सलाहकार फ़र्म ग्लास लुईस ने इसका समर्थन किया। उसका तर्क था कि उनका अनुभव उनके भाई-बहनों आकाश और ईशा जैसा ही है।
कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर नज़र रखने वाले कई जानकार ऐसी नियुक्तियों को इस कसौटी पर परखते हैं कि पद योग्यता से मिला या पारिवारिक रिश्ते से। दूसरी तरफ़ समर्थक कहते हैं कि रिलायंस में प्रमोटर परिवार के पास बड़ी हिस्सेदारी है, इसलिए परिवार का सदस्य लंबी अवधि की ज़िम्मेदारी लेता है। दोनों पक्षों के तर्कों में दम है और अंतिम फ़ैसला पाठक को ख़ुद करना होगा।
अनंत सिर्फ़ रिलायंस इंडस्ट्रीज़ तक सीमित नहीं हैं। वे जियो प्लेटफॉर्म्स, रिलायंस रिटेल वेंचर्स, रिलायंस न्यू एनर्जी और रिलायंस न्यू सोलर एनर्जी जैसी कंपनियों के बोर्ड में भी हैं और 2022 से रिलायंस फ़ाउंडेशन के बोर्ड के सदस्य हैं। मतलब जियो की लिस्टिंग में उनकी मौजूदगी महज़ औपचारिकता नहीं थी, वे उस कंपनी के बोर्ड में भी बैठते हैं। heraldgoa
नई ऊर्जा और ग्रीन एनर्जी की ज़िम्मेदारी
अनंत की पहचान लंबे समय से रिलायंस के नए ऊर्जा कारोबार से जुड़ी रही है। फ़ॉर्च्यून ने 2024 में लिखा था कि उन्हें नए ऊर्जा कारोबार में शामिल किया गया है और वे समूह के नवीकरणीय और हरित ऊर्जा विस्तार की निगरानी करते हैं। उन्होंने अमेरिका की ब्राउन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है।
रिलायंस पारंपरिक तेल-रसायन कारोबार से आगे बढ़कर सोलर, बैटरी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में निवेश कर रही है। ऐसे में अनंत के लिए यह ज़िम्मेदारी बड़ी है और नतीजे आने में समय लगेगा। यह कारोबार आगे चलकर कितना सफल होगा, यह अभी कहना जल्दबाज़ी होगी। लेकिन इतना साफ़ है कि समूह की अगली पीढ़ी का एक बड़ा दाँव इसी क्षेत्र पर है।
वनतारा: सबसे चर्चित और सबसे विवादित पहचान
आम लोगों के बीच अनंत की सबसे बड़ी पहचान वनतारा से बनी है। यह गुजरात के जामनगर में रिलायंस की रिफ़ाइनरी परिसर के भीतर बना वन्यजीव बचाव और पुनर्वास केंद्र है। हेराल्ड गोवा के मुताबिक यह करीब 3,000 एकड़ में फैला है और बचाव, पुनर्वास और संरक्षण का काम करता है।
सुप्रीम कोर्ट की जाँच
वनतारा बीते साल क़ानूनी जाँच के घेरे में भी आया। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त (2025) को पूर्व जज जस्टिस जे. चेलमेश्वर की अध्यक्षता में एक विशेष जाँच दल (SIT) बनाया। उसे एक याचिकाकर्ता के लगाए आरोपों की जाँच करनी थी। इन आरोपों का दायरा द वायर ने इस तरह बताया: कई खोजी रिपोर्टों में कहा गया था कि वनतारा के विदेशी वन्यजीव ख़रीदने से दुनिया भर में अवैध वन्यजीव व्यापार को बल मिल सकता है।
जाँच बहुत तेज़ चली। SIT ने गठन के सिर्फ़ 18 दिन बाद 12 सितंबर को सीलबंद रिपोर्ट अदालत को सौंप दी। फिर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने रिपोर्ट रिकॉर्ड पर ली और कंप्लायंस व नियामकीय उपायों पर जाँच दल की संतुष्टि को दर्ज किया। द न्यूज़ मिनट के मुताबिक अदालत ने माना कि जानवरों के अधिग्रहण में कानूनी और नियामकीय ढाँचे का पूरा पालन हुआ था। इसके बाद मामला बंद कर दिया गया।
आलोचना भी हुई
इस फ़ैसले पर सवाल भी उठे। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अगले दिन टिप्पणी की कि काश सभी मामलों का निपटारा इतनी ही तेज़ी से होता। सुप्रीम कोर्ट ऑब्ज़र्वर ने भी अपने विश्लेषण में लिखा कि पीठ ने SIT के निष्कर्ष बिना झिझक मान लिए, लेकिन उसके निर्देश आगे और सवाल खड़े करते हैं।
निष्पक्ष तरीक़े से देखें तो तस्वीर यह है: देश की सर्वोच्च अदालत ने जाँच दल की रिपोर्ट के आधार पर वनतारा को क़ानूनी रूप से सही माना और मामला बंद कर दिया। साथ ही कुछ राजनीतिक और विश्लेषक हलकों में प्रक्रिया की पारदर्शिता और रफ़्तार पर सवाल बने रहे। इसलिए इस विषय पर लिखते समय किसी एक पक्ष की भाषा से बचना ही ठीक है।
अक्टूबर 2026 की नई पहल: “चैंपियंस ऑफ केयर”
वनतारा से जुड़ी सबसे ताज़ा ख़बर इसी महीने की है। योरस्टोरी की रिपोर्ट के अनुसार विश्व पशु दिवस के मौक़े पर अनंत ने “चैंपियंस ऑफ केयर” नाम की राष्ट्रीय पहल शुरू की। इसका मक़सद स्थानीय संस्थाओं को लंबे समय की मदद देकर देश भर में सामुदायिक जानवरों की देखभाल को मज़बूत करना है।
इस पहल की बारीकियाँ भी दिलचस्प हैं:
- पैमाना: रिपोर्ट के मुताबिक इस नेटवर्क में 50 से ज़्यादा संगठन जुड़े हैं और हर साल लगभग 20 लाख सामुदायिक जानवरों की देखभाल में सहयोग का लक्ष्य है।
- शुरुआत कैसे हुई: घोषणा जामनगर में वनतारा पर हुई दो दिन की बैठक के बाद हुई। उसमें भाग लेने वाले गैर-लाभकारी संगठनों के प्रतिनिधि और भारतीय पशु कल्याण बोर्ड के आठ सदस्य मौजूद थे।
- आगे की योजना: नेटवर्क को आने वाले सालों में और बढ़ाने की बात कही गई है।
इस पहल की एक ख़ास बात यह है कि इसका ध्यान गली-मोहल्ले के आम जानवरों पर है, जबकि वनतारा की पहचान अब तक बड़े और दुर्लभ वन्यजीवों से रही है। जो लोग सड़कों पर रोज़ पशुओं की मदद करते हैं, उन्हें इससे फ़ायदा मिल सकता है। अनंत के शब्दों में, ऐसे बहुत-से लोग चुपचाप ज़रूरतमंद जानवरों की देखभाल करते हैं, अक्सर सीमित संसाधनों में और बिना पहचान के।
“मैंने सिर्फ़ साम्राज्य नहीं पाया, ज़िम्मेदारी पाई है”
बिज़नेस टुडे ने लिस्टिंग के दिन अनंत का एक पुराना बयान याद दिलाया। उसके अनुसार उन्होंने 2024 की शुरुआत में कहा था कि उन्हें केवल एक साम्राज्य विरासत में नहीं मिला, बल्कि एक ज़िम्मेदारी भी मिली है। रिपोर्ट के मुताबिक यह बात उस दौर की है जब वे वनतारा की शुरुआत और अपने विवाह-पूर्व समारोहों के सिलसिले में मीडिया से बात कर रहे थे।
यह वाक्य सुनने में अच्छा लगता है, पर इसकी असली परीक्षा आने वाले सालों के नतीजों में होगी। विरासत में मिली ज़िम्मेदारी तभी सार्थक कही जाएगी जब उसका असर कंपनी के प्रदर्शन, पर्यावरण और समाज पर दिखे।
2024 की शादी, जो आज भी चर्चा में आती है
अनंत का नाम आते ही 2024 की शादी का ज़िक्र अक्सर छिड़ जाता है। यूरोन्यूज़ के अनुसार उन्होंने अपनी लंबे समय की मित्र राधिका मर्चेंट से मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर और परिवार के घर में शादी की। समारोह में उद्योगपति, राजनेता और फ़िल्मी हस्तियाँ शामिल हुईं। विकिपीडिया के मुताबिक यह आयोजन 12 से 18 जुलाई 2024 तक चला।
इस पर उस समय देश-विदेश में तीखी बहस हुई थी कि इतने भव्य आयोजन का औचित्य क्या है। समर्थकों ने इसे भारतीय संस्कृति और कारीगरों के लिए रोज़गार का मौक़ा बताया, जबकि आलोचकों ने दिखावे और असमानता का सवाल उठाया। दो साल बाद यह चर्चा काफ़ी ठंडी पड़ चुकी है और अब उनकी पहचान मुख्य रूप से उनके कारोबारी और संरक्षण के काम से बन रही है।
आगे क्या देखना चाहिए?
अगले कुछ महीनों में इन बातों पर नज़र रखना दिलचस्प रहेगा:
- नए ऊर्जा कारोबार की प्रगति: सोलर और बैटरी जैसे प्रोजेक्ट कब तक बड़े पैमाने पर उत्पादन तक पहुँचते हैं।
- जियो की लिस्टिंग के बाद की भूमिका: अब जियो पर शेयरधारकों और बाज़ार की निगाह रहेगी, और बोर्ड के सदस्य के तौर पर अनंत के फ़ैसले भी जाँच के दायरे में रहेंगे।
- वनतारा की पारदर्शिता: सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बावजूद संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाले कई लोग चाहते हैं कि संस्थान अपने आँकड़े और प्रक्रियाएँ खुलकर साझा करे।
- चैंपियंस ऑफ केयर का असर: ज़मीन पर कितनी संस्थाओं को वास्तव में मदद मिलती है और कितनी लंबी अवधि तक।
निष्कर्ष
अनंत अंबानी की कहानी एक ऐसे उत्तराधिकारी की कहानी है जो एक साथ तीन भूमिकाओं में दिख रहा है: कॉर्पोरेट बोर्ड का सदस्य, नए ऊर्जा कारोबार का चेहरा और वन्यजीव संरक्षण की पहल का संस्थापक। हर भूमिका के साथ तारीफ़ें भी मिल रही हैं और सवाल भी।
फ़िलहाल तथ्य यह है कि उन्हें शेयरधारकों का भारी समर्थन मिला, सुप्रीम कोर्ट ने वनतारा के मामले में क़ानूनी उल्लंघन नहीं पाया और जियो की ऐतिहासिक लिस्टिंग के मंच पर वे परिवार की ओर से बोले। असली मूल्यांकन नतीजों से होगा, और उसके लिए समय चाहिए।
अस्वीकरण: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें किसी कंपनी के शेयर में निवेश की सलाह नहीं दी गई है।
स्रोत: आईएएनएस, योरस्टोरी, बिज़नेस टुडे, हेराल्ड गोवा, बार एंड बेंच, द वायर, द न्यूज़ मिनट, सुप्रीम कोर्ट ऑब्ज़र्वर, यूरोन्यूज़, फ़ॉर्च्यून (28 अक्टूबर 2026 तक की रिपोर्टें)।